आधुनिक है भारत का प्राचीन विज्ञान

भारत  एक विकासशीलदेश है. जिसके पास सबसे अधिक संसाधन अर्थात जनसंख्या है, जोकि विश्व में चीन के बाद दूसरे नम्बर पर है. चिंता का विषय यह है कि इतने बड़े संसाधन से परिपूर्ण होने के बावजूद भी , अपितु सर्वाधिक युवा होने पर भी भारत की विकास दर धीमी है.
हालाँकि पिछले २-३ सालों में श्री नरेंद्र मोदी जी के अथक प्रयासों से इसमें काफी सुधार आया है.
इसकी हम मुख्य वजह मान सकते हैं Talent Dry अर्थात भारत के महान कौशल का विदेशों में अनुदान। भारत में इतना कौशल भरा पड़ा है कि हम जानते हैं कि प्रतिष्ठित विदेशी कम्पनियां जैसे Google के CEO श्री सुन्दर पिचाई जी,  MicrosoftNokia , AppleAdobeIBM में भारत के लोग ही काफी प्रतिशत मात्रा में हैं.
भारत के युवा विदेशों में पलायन कर रहे हैं ,अच्छा धन व नौकरी के लिए. परन्तु हमारा इतिहास इतना गौरवशाली है कि विश्व के बड़े बड़े विद्वान यहां अध्ययन के लिए आते थे और भारत में न जाने कितने बड़े बड़े महर्षि और विद्वान हुए हैं. पुष्पक विमान जिसका जिक्र रामायण में है वो प्राचीन भारत की प्रौद्योगिकी की ही पहचान था. समुद्र में नल – नील द्वारा निर्मित पुल जिसका प्रमाण NASA दे चुका है. अतः प्राचीन विज्ञान , वर्तमान विज्ञान से अधिक कर्मठ था. ‘विज्ञान‘ शब्द में , Science से अधिक ज्ञान निहित है. अब अगर बात वर्तमान समय के विज्ञान की करें तो अन्य देशों की प्रौद्योगिकी को ही हम महान समझते हैं और अपनाते हैं और अपने देश में कमी निकालते रहते हैं, परन्तु बहुत लोग अपने देश के इतिहास और आध्यात्मिकता से अनभिज्ञ हैं.