कोरोना संकट के बीच मजदूर क्यों लौट रहें हैं अपने गाँव की ओर?

आप सभी ने टीवी और सोशल मीडिया पर तो देखा ही होगा कि देश के अलग अलग शहरों से मजदूरों का पलायन हो रहा है. परन्तु ऐसा क्या कारण है जिससे कि सारे मजदूर शहरों को छोड़ने पर विवश हैं.

कोई पैदल आ रहा है और कोई साइकिल से या फिर बीच बीच में लिफ्ट मांग कर अपना पथ तय करते हुए अपने गाँव की ओर प्रस्थान कर रहे हैं. अब इसके लिए सरकार भी मदद के लिए सामने आई है. मगर इस देश में पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक मदद का पहुँचना कितना कठिन होता है, इसका साक्षी इतिहास है.

अब आपके मन में यह आता होगा कि जो लोग अपना पेट पालने के लिए अपना घर गाँव छोड़कर शहरों में रह रहे थे. वो गांव में कैसे रह पाएंगे. शहरों में न तो कमाने को है ना ही खाने को. मगर 2 महीनों के लॉक डाउन के बाद मजदूर वर्ग कैसे खा पाएगा. मगर गाँव में ऐसा क्या है जो शहरों में नहीं.

इसके जबाव में मेरा व्यतिगत मत आपके समक्ष प्रस्तुत करने जा रहा हूँ. दरअसल गाँवो में कुछ कमाने का साधन हो या न हो पर खाद्यान्न की कमी वहां नहीं होती है. अपने खेतों में ही अनाज पैदा होता है. जबकि शहरों में वही अन्न इतनी कीमतों में मिलता है जोकि मजदूर वर्ग के लिए एक चिंता का विषय हो जाता है. इसलिए गांव में आ जाने पर वो अवश्य ही रोजगार से वंचित तो रहेंगे परन्तु खाद्य की कमी उन्हें नहीं होगी.

बीते दिन हुई दर्दनाक घटना से यह पता लग जाता है कि भारत में गरीबी और गरीब अभी भी दयनीय स्थिति में ही है. जिसे किस तरह से हैंडल करना है. वो सरकार की इच्छा शक्ति और स्थानीय प्रशासन की सक्रियता पर निर्भर करता है.

इस पोस्ट में सभी तथ्य और कथन लेखक के विवेक और अनुभव के आधार पर लिखे गए हैं. अतः किसी भी विरोध की स्थिति में अपने विवेक से काम लें अथवा हमें सूचित करें.

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